In Love….all over again

That day, a sweet fragrance swept in
          through the windows of my dream
Colours from the morning sun
          brought back memories of last spring

Like a brush moving softly on a canvas
          the rays painted a picture on the floor
A hazy face, a forgotten smile
          brought memories long lost as lore

Some shadows arose of past evening walks
          some voices echoed with your radiant laugh
The smell that came with fresh rain drops
          Reminded of nights you wept, on my behalf

Those days of love have long gone
          and gone are the nights of rain
But yet I smile remembering your shining eyes
          which make me fall in love, all over again… 

                                                                -Saunak Pal

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बेमौसम बरसातें

कल शाम अचानक कहीं दूर से

एक बादल चला आया था गरज के

अपने साथ लाया वो कुछ हलकी बारिश की बूंदें

देखते ही देखते, सारा मौसम बदल-सा गया

मिट्टी से आती ख़ुश्बू से सारा आलम महक-सा गया

पंछियाँ भी इस माहौल मैं चहकने लगे झूम के

वीरान पड़ा ये मैदान भी गूंजने लगा शोर से
फिर आया एक झोंका कहीं से

साथ ले गया उस बादल को उड़ाकर

चंद पलों के लिए हँसती इन गलियों को

फिर से वीरान बनाकर
बड़ी बेईमान होती हैं ये बेमौसम बरसातें

कुछ पलों के लिए आ कर

कई उम्मीद जगा जाती हैं

ले आती हैं पिछले मौसम के मीठी यादें,

उन यादों को जगाकर

 तन्हाई का एहसास फिर दिलाती हैं
फिर लौट जाती हैं वो,

पीछे छोड़कर एक गीली-सी सड़क

ज़मीन पर पड़ी कुछ बूंदे,

एक हलकी-सी महक
उन बून्दों में मुझे एक टूटी परछाई नज़र आती है

सूखते हुए पानी के साथ वो और धुंधली होती जाती है…

— शौनक पाल